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Saturday, March 12, 2011

मैं जीना चाहता हूँ

छोड़ दो अकेला मुझे, तनहा रहने दो
मैं जिंदगी को पहचानना चाहता हूँ
मैं उड़ना चाहता हूँ, हवाओं को पीना चाहता हूँ
जिंदगी के सभी बिखरे टुकड़ों को सीना चाहता हूँ
मुझे ज़िंदगी जीने दो मैं जीना चाहता हूँ
मैं भीड़ में दौड़ना चाहता हूँ और सन्नाटों में टहलना चाहता हूँ
मैं धुप में नहाना चाहता हूँ और बारिशों में सूखना चाहता हूँ
मुझे ज़िंदगी जीने दो मैं जीना चाहता हूँ
---निशांत (३/११/२०११)

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